कब होता है पीपल के वृक्ष में दरिद्रता का वास
रविवार को छोड़ कर बाकी दिन पीपल पर जल अर्पण करना शुभ होता है । रविवार को पीपल में दरिद्रता का वास होता है इसलिए उस दिन पीपल पूजने से घर मे दरिद्रता आ जाती हैं ।
एक बात और पीपल पर सूर्योदय से पहले कभी भी जल नही चढ़ाना चाहिए । उस समय भी दरिद्रता का निवास पीपल पर होता है । पीपल पर हमेशा सूर्योदय के बाद में ही जल चढ़ाना चाहिए ।
शास्त्रो में इस विषय पर एक लघुकथा प्रचलित है । जो इस प्रकार है--
रविवार को पीपल की पूजा नहीं की जाती क्योंकि जब विष्णु भगवान ने माता लक्ष्मी से विवाह करना चाहा तो लक्ष्मी माता ने मना कर दिया था क्योंकि उनकी बहन दरिद्रा का विवाह नहीं हुआ था। दरिद्रा के विवाह के उपरांत ही वह श्री हरी विष्णु से विवाह कर सकती थी।
उन्होंने दरिद्रा से पूछा," वो कैसा वर पाना चाहती हैं।"तो वह बोली कि," वह ऐसा पति चाहती हैं जो कभी पूजा-पाठ न करे और उसे ऐसे स्थान पर रखे जहां कोई भी पूजा-पाठ न करता हो। तब श्री विष्णु ने उनके लिए दुःसह ऋषि नामक वर चुना और दोनों विवाह सूत्र में बंध गए।
अब दरिद्रा की शर्तानुसार उन दोनों को ऐसे स्थान पर वास करना था जहां कोई भी धर्म कार्य न होता हो। ऋषि उसके लिए उसका मन भावन स्थान ढूंढने निकल पड़े लेकिन उन्हें कहीं पर भी ऐसा स्थान नही मिला। दरिद्रा उनकी प्रतीक्षा में विलाप करने लगी और यहाँ श्री विष्णु ने पुन: लक्ष्मी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा तो लक्ष्मी जी बोली," जब तक मेरी बहन की गृहस्थी नहीं बसती मैं विवाह नहीं करूंगी।
धरा पर ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां कोई धर्म कार्य न होता हो। उन्होंने अपने निवास स्थान पीपल को रविवार के लिए दरिद्रा व उसके पति को दे दिया। अत: हर रविवार पीपल के नीचे देवताओं का वास न होकर दरिद्रा का वास होता है। अत: इस दिन पीपल की पूजा वर्जित मानी जाती है।
#विशेष --शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है ।
🚩🚩 जय माता दी 🚩🚩
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