आईपीओ (IPO) क्या है,
आईपीओ क्या है: What is IPO?
आईपीओ (IPO) का मतलब प्रारंभिक पब्लिक पेशकश इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग है।
लेकिन इसका क्या तात्पर्य है? प्रत्येक शब्द का पूर्ण रूप से एक विशिष्ट अर्थ है |
- इनिशियल का तात्पर्य शुरुआत से है।
- पब्लिक का मतलब विशेष रूप से आम जनता के लिए है ,आप, मैं, या कोई भी।
- ऑफरिंग का मतलब कुछ देना से है, या दिया जाने से है। चूंकि हम शेयर बाजार के बारे में बात कर रहे हैं, यह निश्चित रूप से से वित्त संबंधित है|
जब किसी कंपनी को वित्त की आवश्यकता होती है तो कम्पनी के पास दो स्त्रोत होते है या तो वो जनता से धन एकत्रित करे या फिर वो बैंक से लोन ले.
तो जब जब कोई कंपनी इक्विटी में जनता से धनराशी एकत्रित करना चाहती हैं तो उस समय वह शेयर मार्केट में लिस्टेड होकर अपने जनरल शेयर को पब्लिक के सामने पहली बार इश्यु करती है, इसी प्रक्रिया को इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) कहते है। आसन भाषा में IPO को पब्लिक इश्यु भी कहा जाता है. आईपीओ मिनिमम 3 दिन ओर अधिकतम 10 दिनों तक खुला रहता है | इस अवधि के बीच निवेशक आईपीओ खरीद सकता है |
आईपीओ में SEBI की भूमिका
आईपीओ में कीमत कैसे तय होती है
- प्राइस बैंड
- दूसरा फिक्स्ड प्राइस इश्यू
प्राइस बैंड
जिन कंपनियों को आईपीओ लाने की अनुमति है वह सभी अपने शेयरों की कीमत तय कर सकती हैं | इसके अतिरिक्त इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुछ दूसरी क्षेत्रों की कंपनियों को सेबी और बैंकों को रिजर्व बैंक से अनुमति लेनी अनिवार्य है | भारत में 20 फीसदी प्राइस बैंड की अनुमति है | यदि किसी आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 90-100 रुपये रखा गया है| निवेश 90 रुपये की बोली लगाता है, मगर IPO कीमत 98 निकलती है, तो उसे एक भी शेयर नहीं मिलेगा | इसका अर्थ है कि निवेशक की बोली निरस्त कर दी जाती है | यदि लगता है कि इस आईपीओ को हाथोंहाथ लिया जाएगा और वैल्यूएशन भी वाजिब नजर आती है, तो प्राइस बैंक की ऊपरी सीमा पर आईपीओ के लिए बोली लगा सकते है | यदि आईपीओ के लिए 100-110 रुपये का प्राइस बैंड है, तो आईपीओ के लिए 110 रुपये की बोली लगा सकते है |
अंतिम मूल्य (कट ऑफ प्राइस)
बैंड प्राइस तय होने के पश्चात किसी भी कीमत के लिए बोली लगा सकता है | व्यक्ति कटऑफ बोली भी लगा सकता है | कंपनी ऐसा मूल्य तय करती है, जहां उसे लगता है कि उसके सारे शेयर बिक जाएंगे |
यदि निवेशक द्वारा दी गई कीमत वास्तिवक कीमत से कम है, तो निवेशक को शेयर नहीं मिलते| इसके लिए निवेशकों को कट ऑफ प्राइस का सहारा लेना चाहिए| केवल रिटेल निवेशक ही इसका फायदा ले सकते हैं. निवेशकों को कट-ऑफ विकल्प पर हामी भरनी चाहिए|
इसका सीधा सा अर्थ यह होता है कि प्राइस बैंक के लिमिट के भीतर, शेयर की कीमत कुछ भी निकले, निवेशक उसी कीमत पर शेयर खरीदेगा | यानी कि वह कंपनी की अपनी कीमत देने के बजाय, कंपनी द्वारा बताई गई कीमत पर शेयर खरीदेगा |
रिटेल निवेशक कितने रूपये की बोली लगा सकता है
एक आईपीओ में एक रिटेल निवेशक अधिकतर 2 लाख रुपये तक की बोली लगा सकता है | हालांकि, इसके लिए न्यूनमत बोली होना जरूरी है | इसका अर्थ है कि यदि किसी आईपीओ में एक लॉट 15 शेयरों की है, तो आपको कम से कम 15 शेयरों के लिए बोली लगानी ही होगी |
एक निवेशक को कम से कम एक लॉट खरीदना अनिवार्य होता है | यदि आईपीओ को अत्याधिक सब्सक्राइब होता है, तो निवेशकों को अनुपातिक आधार पर ही शेयरों का आवंटन किया जाता है |
इसके अतिरिक्त शेयर आवंटन के लिए लकी ड्रॉ का इस्तेमाल भी किया जाता है | इसलिए कई निवेशक अपने परिजनों के नाम से भी बोली लगाते हैं | इस वजह से उस परिवार को एक व्यक्ति की तुलना में शेयर आवंटन की संभवानाएं और बढ़ जाती है |
Comments
Post a Comment